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Showing posts from June, 2021

वृहद ब्रह्मांड -3-- क्या हमारा ब्रह्माण्ड स्थिर है !

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सारी दुनिया स्थिर है ! जब मैंने एक सज्जन से कहा तो उन्होंने कहा:-   सुनने में बड़ा अटपटा सा लग रहा है। सारी दुनिया गतिशील है और आप कह रहे हैं कि पूरी दुनिया स्थिर है !  तो मैंने कहा -- कभी कभी स्थिर चीज भी गतिशील मालूम पड़ते हैं और गतिशील चीज भी स्थिर। आपने सिनेमा देखा होगा। सिनेमा के पर्दे पर फिल्म चलती है जिसे हम चलचित्र कहते हैं। सिनेमा के पर्दे पर हमें चलते हुए चित्र दिखाए जाते हैं। आप ध्यान से सोंचे तो क्या पर्दे पर कोई चित्र चलता है? वास्तव में पर्दे पर कोई चित्र नहीं चलता है बल्कि हमें चलते हुए दिखाई देते हैं। होता ये है कि कोई चित्र अपने स्थान से गायब हो जाता है और उसी के जैसा नया चित्र आगे प्रकट हो जाता है और हमें लगता है कि वही चित्र आगे बढ़ गया। पर्दे पर कोई चित्र नहीं चलता है बल्कि ये चित्र अपने स्थान से गायब होते रहते है और आगे आगे नए चित्र प्रकट होते जाते हैं। पर्दे पर इन चित्रों चलना सिर्फ दो आयामों में होता है। उसी प्रकार हमारे इस त्रिआयामी ब्रह्मांड में भी जब कोई पिंड गति करता है तो वह स्वयं आगे नहीं बढ़ता बल्कि वह पिंड अपने स्थान से गायब होकर...

वृहद ब्रह्मांड -2 बृहद ब्रह्मांड की संरचना और इसकी कार्य प्रणाली

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          बृहद ब्रह्मांड की संरचना और इसकी कार्य प्रणाली   हम धरती पर रहते हैं । हमारी धरती हमारे ब्रह्मांड   में अवस्थित है। हमारा ब्रह्माण्ड एक वृहद ब्रह्मांड में अवस्थित है। आइए बृहद ब्रह्मांड के संरचना और इसके कार्य प्रणाली के बारे में विचार करते हैं। वृहद ब्रह्मांड में आकाश ( space) के छोटे छोटे पॉकेट अवस्थित हैं। मधुमक्खी के छत्ते की तरह। मधुमक्खी के छत्ते में छोटे छोटे पॉकेट होते हैं जिसमें मधु भरे होते हैं। हम दूसरा उदाहरण एक संतरे को ले सकते हैं। संतरे के अंदर भी छोटे छोटे पॉकेट होते हैं जिसमे संतरे का रस भरा होता है। इसी प्रकार वृहद ब्रह्मांड में भी आकाश के छोटे छोटे पॉकेट अवस्थित हैं। वृहद ब्रह्मांड में बहुत ही छोटे छोटे उर्जा कण भी भरे हुए हैं और वृहद ब्रह्मांड के अन्दर गतिशील हैं। वृहद ब्रह्मांड में आकाश के पॉकेट भी भरे हुए हैं जो स्थिर हैं और मूल रूप से रिक्त हैं। यानि कि वृहद ब्रह्मांड में आकाश के छोटे छोटे पॉकेट भी हैं जो कि स्थिर हैं तथा मूलरूप से रिक्त हैं एवम छोटे छोटे उर्जा कण भी भरे हुए हैं जो की गतिशील हैं। वृहद ब्रह्मांड क...

वृहद ब्रह्मांड-1 हमारा ब्रह्मांड नये नजरिए से

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  हमारा ब्रह्मांड नये नजरिए से   ब्रह्माण्ड कैसे बना ? यह कहाँ से आया ? यह कहाँ जा रहा है ? इत्यादि  अनेकों प्रश्न ऐसे हैं जिसका जबाब खोजने   के लिए मनुष्य  सदियों से प्रयासरत्त है . वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दोनों तरह के प्रयास    जारी   हैं ! वैज्ञानिक अपने-अपने सिधान्तों एवं प्रयोगों द्वारा प्रयास कर रहें हैं तो संत महात्मा लोग पौराणिक ग्रंथों एवं ध्यान का सहारा ले रहे हैं ! ब्रह्माण्ड क्या है ? कैसे बना ? कौन बनाया ? कहाँ से आ रही है एव कहाँ जा रही है ? इत्यादि इन प्रश्नों पर अलग-अलग मत्त हैं। अलग-अलग वैज्ञानिकों   का अलग-अलग मत्त हैं । उसी प्रकार अलग-अलग अध्यात्मिक ज्ञानियों का भी अलग-अलग मत हैं ! सभी धर्म अपने-अपने धर्मानुसार इस ब्रह्माण्ड की व्याख्या करते हैं ! चाहे धार्मिक व्याख्या हो या वैज्ञानिक , अभी तक किसी के पास कोई ठोस प्रमाण   नहीं है ! सबका  अपना-अपना दर्शन है ! सबकी अपनी-अपनी फिलोसफी है ! वैज्ञानिक हेड्रन   कोलाईडर बनाकर ये पता लगा रहे हैं कि ब्रह्माण्ड कि उत्पत्ति कैसे हुई! अपने-अपने प्रयोगों पर व...