वृहद ब्रह्मांड -2 बृहद ब्रह्मांड की संरचना और इसकी कार्य प्रणाली

         बृहद ब्रह्मांड की संरचना और इसकी कार्य प्रणाली

 हम धरती पर रहते हैं । हमारी धरती हमारे ब्रह्मांड  में अवस्थित है। हमारा ब्रह्माण्ड एक वृहद ब्रह्मांड में अवस्थित है। आइए बृहद ब्रह्मांड के संरचना और इसके कार्य प्रणाली के बारे में विचार करते हैं।

वृहद ब्रह्मांड में आकाश (space) के छोटे छोटे पॉकेट अवस्थित हैं। मधुमक्खी के छत्ते की तरह। मधुमक्खी के छत्ते में छोटे छोटे पॉकेट होते हैं जिसमें मधु भरे होते हैं। हम दूसरा उदाहरण एक संतरे को ले सकते हैं। संतरे के अंदर भी छोटे छोटे पॉकेट होते हैं जिसमे संतरे का रस भरा होता है। इसी प्रकार वृहद ब्रह्मांड में भी आकाश के छोटे छोटे पॉकेट अवस्थित हैं। वृहद ब्रह्मांड में बहुत ही छोटे छोटे उर्जा कण भी भरे हुए हैं और वृहद ब्रह्मांड के अन्दर गतिशील हैं। वृहद ब्रह्मांड में आकाश के पॉकेट भी भरे हुए हैं जो स्थिर हैं और मूल रूप से रिक्त हैं। यानि कि वृहद ब्रह्मांड में आकाश के छोटे छोटे पॉकेट भी हैं जो कि स्थिर हैं तथा मूलरूप से रिक्त हैं एवम छोटे छोटे उर्जा कण भी भरे हुए हैं जो की गतिशील हैं। वृहद ब्रह्मांड के ये आकाश पॉकेटों के झुण्ड हमारे ब्रह्मांड के लिए एक स्थिर आधार प्रदान करते हैं। एक स्थिर ढाँचा प्रदान करते हैं। 

जहाँ तक ये पॉकेट फैले हुए हैं वहाँ तक हमारा ब्रह्माण्ड है।

जिस प्रकार संतरा का रस सिर्फ पॉकेटों में ही रहते हैं, उसी प्रकार हमारे ब्रह्मांड के कण भी वृहद ब्रह्मांड में अवस्थित आकाश पॉकेटों में स्थित रहते हैं। वृहद ब्रह्मांड में अवस्थित इन आकाश पॉकेटों का आकार हमारे ब्रह्मांड के सबसे छोटे कण के बराबर होता है। यानि एक पॉकेट के आकार से छोटा कण हमारे ब्रह्मांड में नहीं रह सकता है। 

जैसा कि पहले बताया गया है कि वृहद ब्रह्मांड में आकाश के पॉकेट स्थिर अवस्था में हैं तथा ऊर्जा कण गतिशील हैं। ये ऊर्जा कण कई प्रकार के हैं और वृहद ब्रह्मांड में गतिशील हैं। ये ऊर्जा कण गति के दौरान उन आकाश पॉकेटों में अंदर चले जाते हैं और खास तरह के ऊर्जा कण उसमें फंस जाते हैं। जो ऊर्जा कण इन आकाश पॉकेटों में फंस जाते हैं वे उससे निकल नहीं पाते। ज्योंहि कोई ऊर्जा कण इन पॉकेटों में फंस जाता हैं, वह कण हमारे ब्रह्मांड में सबसे छोटे कण के रूप में प्रकट हो जाता है। वह कण तबतक हमारे ब्रह्मांड में रहता है जबतक वह पुनः वृहद ब्रह्मांड में नहीं चला जाता। इस तरह के अनगिनत कण लगातार हमारे ब्रह्मांड में प्रकट होते रहते हैं। ये कण आपस में मिलकर परमाणु के अवयवों (क्वार्क, इलेक्ट्रॉन इत्यादि) का निर्माण करते हैं। ये अवयव परमाणुओं का निर्माण करते हैं। परमाणु आपस में मिलकर नए नए तत्त्व एवम योगिकों का निर्माण करते हैं। ये तत्त्व एवम यौगिक मिलकर बड़े बड़े पिंडों का निर्माण करते हैं।

जैसा कि पहले बताया गया कि हमारे ब्रह्मांड के सबसे छोटे छोटे कण मिलकर परमाणु का निर्माण करते हैं। इसका मतलब ये नहीं हुआ कि दो कण आपस में सट गए। चुकी ये कण अलग अलग पॉकेट में हैं तो वे आपस में सटे नहीं हैं बल्कि दोनों कण आकर्षण शक्ति के कारण आपस में संबद्ध हो जाते हैं और एक परमाणु की तरह काम करने लगते हैं। 

जैसा ऊपर चित्र में दिखाया गया है की वृहद ब्रह्मांड में कई आकार के पॉकेट अवस्थित हैं । उसमे से एक समान आकार वाले यानि एक समान ऊर्जा ग्रहण करने वाले सभी पॉकेट एक ब्रह्मांड के होते हैं।चुकि कई आकार के पॉकेट हैं अतः कई ब्रह्मांड हो सकते हैं। हमारे ब्रह्मांड के भी सभी पॉकेट एक समान आकार वाले हैं। नीचे चित्र में सिर्फ हमारे ब्रह्मांड के पॉकेट दिखाए गए हैं। जहाँ तक ये पॉकेट फैले हुए हैं वहाँ तक हमारा  ब्रह्माण्ड अवस्थित है।

हमारे ब्रह्मांड के इन पौकेटों का आकार हमारे ब्रह्मांड के सबसे छोटे कण के बराबर होता है। एक पॉकेट से छोटे आकार के कण हमारे ब्रह्मांड में नहीं रह सकता है । उससे छोटा होने पर वह छोटा कण बृहद ब्रह्मांड मे चला जाएगा । हमारे ब्रह्मांड का कोई बड़ा पिंड बहुत सारे कणों का समूह है और हर कण एक एक पॉकेट को लिए हुए है। कोई पिंड जिस आकार का है, उस आयतन के अंतर्गत बहुत से पॉकेट हैं जिसमे कुछ रिक्त हैं तो कुछ में कण हैं। यदि पिंड के आकार के अंतर्गत स्थित पोकेटों में से ज्यादा रिक्त होंगे तो उस पिंड का घनत्व कम होगा और यदि ज्यादा पॉकेट कणों से भरे हुए होंगे तो पिंड का घनत्व ज्यादा होगा।

आइए अब हम, हमारे ब्रह्मांड के किसी पिंड की गति पर विचार करते हैं । हमारे ब्रह्मांड का कोई भी पिंड जब गति करता है तो उस पिंड के सारे कण एक साथ गति करते हैं । जैसा की ऊपर के चित्र में पोकेटों को दिखाया गया है, ये पॉकेट अलग अलग हैं । हर पॉकेट के बाहर वृहद ब्रह्मांड है । हमारे ब्रह्मांड के ये पॉकेट हमारे ब्रह्मांड के लिए स्थिर हैं और हर कण इन पोकेटों में स्थित हैं। अब प्रश्न उठता है की हमारे ब्रह्मांड के कण इन स्थिर पोकेटों में हैं तो गति कैसे करेंगे क्योंकि हर पॉकेट के बाहर वृहद ब्रह्मांड है और कण सिर्फ अपने ब्रह्मांड के पोकेटों मे ही रह सकता है। 

किसी पिंड की गति के दौरान होता ये है कि उस पिंड का हर कण अपने पॉकेट से गायब होकर सीधे आगे के पॉकेट में प्रकट हो जाता है। पुनः वहाँ से गायब होकर उसके आगे के पॉकेट में प्रकट हो जाता है। इस प्रकार गति के दौरान कोई भी पिंड स्वम आगे नहीं बढ़ता है बल्कि अपने स्थान से गायब होकर उसी के जैसा पिंड आगे प्रकट होता जाता है और हमे लगता है कि वही पिंड आगे बढ़ रहा है । हम भी जब आगे बढ़ते हैं तो हमारा वही शरीर आगे नहीं जाता बल्कि वह शरीर वहीं गायब हो जाता है और उसी के जैसा नया शरीर आगे प्रकट हो जाता है। गति के दौरान पुराना शरीर गायब होते रहता है और नया समरूप शरीर प्रकट होते रहता है। नया शरीर इतना समरूप होता है कि हमें पता ही नहीं चलता। हमें लगता है कि वही शरीर है। इस प्रकार गति के दौरान किसी भी पिंड का समरूप पिंड आगे आगे प्रकट होता जाता है और पीछे का पिंड गायब होता जाता है। चूकि हमारे ब्रह्मांड का हर पिंड गतिशील है अतः हर क्षण पूरे ब्रह्मांड के पिंड समरूप पिंडों से परिवर्तित होते जा रहे हैं। 

अगले भाग में इस पर और चर्चा करेंगे। धन्यवाद।।

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